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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 367

नंबर 367किताब 2, नंबर 219
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ بُكَيْرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الأَشَجِّ، عَنْ نَابِلٍ، صَاحِبِ الْعَبَاءِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ صُهَيْبٍ، قَالَ مَرَرْتُ بِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ يُصَلِّي فَسَلَّمْتُ عَلَيْهِ فَرَدَّ إِلَىَّ إِشَارَةً ‏.‏ وَقَالَ لاَ أَعْلَمُ إِلاَّ أَنَّهُ قَالَ إِشَارَةً بِإِصْبَعِهِ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ بِلاَلٍ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَنَسٍ وَعَائِشَةَ ‏.‏
Suhaib narrated:"I passed by Allah's Messenger (S) while he was performing Salat, so I said greeted him with Salam, and he returned it by making signals." He said: "I do not know except that he said: 'He indicated with his finger
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।