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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 348

नंबर 348किताब 2, नंबर 200
حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَيَّاشٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنِ ابْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ صَلُّوا فِي مَرَابِضِ الْغَنَمِ وَلاَ تُصَلُّوا فِي أَعْطَانِ الإِبِلِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that :Allah's Messenger said: "Perform Salat in sheep pens but do not perform Salat in the camels' resting area
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।