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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 334

नंबर 334किताब 2, नंबर 186
حَدَّثَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَبِي جَعْفَرٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ أَبِي الطُّفَيْلِ، عَنْ مُعَاذِ بْنِ جَبَلٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَسْتَحِبُّ الصَّلاَةَ فِي الْحِيطَانِ ‏.‏ قَالَ أَبُو دَاوُدَ يَعْنِي الْبَسَاتِينَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ مُعَاذٍ حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ حَدِيثِ الْحَسَنِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ ‏.‏ وَالْحَسَنُ بْنُ أَبِي جَعْفَرٍ قَدْ ضَعَّفَهُ يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ وَغَيْرُهُ وَأَبُو الزُّبَيْرِ اسْمُهُ مُحَمَّدُ بْنُ مُسْلِمِ بْنِ تَدْرُسَ وَأَبُو الطُّفَيْلِ اسْمُهُ عَامِرُ بْنُ وَاثِلَةَ ‏.‏
Mu'adh ibn Jabal narrated:"The Prophet liked to perform Salat in Al-Hitan
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifBashar Awad Maarouf
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।