सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 313

नंबर 313किताब 2, नंबर 165
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مُوسَى الأَنْصَارِيُّ، حَدَّثَنَا مَعْنٌ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ أَبِي نُعَيْمٍ، وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ مَنْ صَلَّى رَكْعَةً لَمْ يَقْرَأْ فِيهَا بِأُمِّ الْقُرْآنِ فَلَمْ يُصَلِّ إِلاَّ أَنْ يَكُونَ وَرَاءَ الإِمَامِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Abu Nu'aim Wahb bin Kaisan narated that he heard Jabir bin 'Abdullah saying:"Whoever prayed a Rak'ah in which he did not recite Umm Al-Qur'an, then he did not pray except if he was behind an Imam." [Abu 'Eisa said:] This Hadith is Hasan Sahih
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MuqufAhmad Muhammad Shakir
  • Sahih MuqufAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।