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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 297

नंबर 297किताब 2, नंबर 149
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، وَهِقْلُ بْنُ زِيَادٍ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ قُرَّةَ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ حَذْفُ السَّلاَمِ سُنَّةٌ ‏.‏ قَالَ عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ يَعْنِي أَنْ لاَ تَمُدَّهُ مَدًّا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَهُوَ الَّذِي يَسْتَحِبُّهُ أَهْلُ الْعِلْمِ وَرُوِيَ عَنْ إِبْرَاهِيمَ النَّخَعِيِّ أَنَّهُ قَالَ التَّكْبِيرُ جَزْمٌ وَالسَّلاَمُ جَزْمٌ ‏.‏ وَهِقْلٌ يُقَالُ كَانَ كَاتِبَ الأَوْزَاعِيِّ ‏.‏
Abu Hurairah narrated:"Hadhf the Salam is a Sunnah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।