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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 287

नंबर 287किताब 2, नंबर 139
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ اللَّيْثِيِّ، أَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي فَكَانَ إِذَا كَانَ فِي وِتْرٍ مِنْ صَلاَتِهِ لَمْ يَنْهَضْ حَتَّى يَسْتَوِيَ جَالِسًا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ مَالِكِ بْنِ الْحُوَيْرِثِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ ‏.‏ وَبِهِ يَقُولُ إِسْحَاقُ وَبَعْضُ أَصْحَابِنَا ‏.‏ وَمَالِكٌ يُكْنَى أَبَا سُلَيْمَانَ ‏.‏
Malik bin Al-Huwairith Al-Laithi narrated that he saw :Allah's Messenger performing Salat. When he was in an odd number of his Salat, he would not get up until he had sat completely
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।