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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 275

नंबर 275किताब 2, नंबर 127
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي سُفْيَانَ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا سَجَدَ أَحَدُكُمْ فَلْيَعْتَدِلْ وَلاَ يَفْتَرِشْ ذِرَاعَيْهِ افْتِرَاشَ الْكَلْبِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ شِبْلٍ وَأَنَسٍ وَالْبَرَاءِ وَأَبِي حُمَيْدٍ وَعَائِشَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ جَابِرٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَيْهِ عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ يَخْتَارُونَ الاِعْتِدَالَ فِي السُّجُودِ وَيَكْرَهُونَ الاِفْتِرَاشَ كَافْتِرَاشِ السَّبُعِ ‏.‏
Jabir narrated that :the Prophet said: "When one of you prostrates, then let him be balanced, and let him not lay his forearms down like the lying of the dog
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।