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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 263

नंबर 263किताब 2, नंबर 115
قَالَ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ مَهْدِيٍّ، عَنْ شُعْبَةَ، نَحْوَهُ ‏.‏ وَقَدْ رُوِيَ عَنْ حُذَيْفَةَ، هَذَا الْحَدِيثُ مِنْ غَيْرِ هَذَا الْوَجْهِ أَنَّهُ صَلَّى بِاللَّيْلِ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ الْحَدِيثَ ‏.‏
(Another similar narration) This Hadith has been narrated from Hudhaifah :from another route: "That he performed Salat during the night with the Prophet" and he mentioned the Hadith
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।