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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 255

नंबर 255किताब 2, नंबर 107
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا افْتَتَحَ الصَّلاَةَ يَرْفَعُ يَدَيْهِ حَتَّى يُحَاذِيَ مَنْكِبَيْهِ وَإِذَا رَكَعَ وَإِذَا رَفَعَ رَأْسَهُ مِنَ الرُّكُوعِ ‏.‏ وَزَادَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ فِي حَدِيثِهِ وَكَانَ لاَ يَرْفَعُ بَيْنَ السَّجْدَتَيْنِ ‏.‏
Salim narrated from :his father (Ibn Umar) who said: "I saw Allah's Messenger when he opened the Salat, raising his hands to the level of his shoulders, and (again) when he bowed, and when he raised his head from bowing." In his narration, Ibn Abi Umar added: "And he wuld not raise them between the two prostrations
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।