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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 249

नंबर 249किताब 2, नंबर 101
قَالَ أَبُو عِيسَى حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، مُحَمَّدُ بْنُ أَبَانَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا الْعَلاَءُ بْنُ صَالِحٍ الأَسَدِيُّ، عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ، عَنْ حُجْرِ بْنِ عَنْبَسٍ، عَنْ وَائِلِ بْنِ حُجْرٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَ حَدِيثِ سُفْيَانَ عَنْ سَلَمَةَ بْنِ كُهَيْلٍ ‏.‏
(Another chain) from Wa'il bin Hujr who narrated it from :the Prophet, and it is similar to the narrations of Sufyan from Salamah bin Kuhail
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।