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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 237

नंबर 237किताब 2, नंबर 89
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنْ أَخَفِّ النَّاسِ صَلاَةً فِي تَمَامٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَاسْمُ أَبِي عَوَانَةَ وَضَّاحٌ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى سَأَلْتُ قُتَيْبَةَ قُلْتُ أَبُو عَوَانَةَ مَا اسْمُهُ قَالَ وَضَّاحٌ ‏.‏ قُلْتُ ابْنُ مَنْ قَالَ لاَ أَدْرِي كَانَ عَبْدًا لاِمْرَأَةٍ بِالْبَصْرَةِ ‏.‏
Anas [bin Malik] narrated:"Allah's Messenger was among the lightest of people in Salat with its completeness
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।