सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 225

नंबर 225किताब 2, नंबर 77
وَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَوْ أَنَّ النَّاسَ يَعْلَمُونَ مَا فِي النِّدَاءِ وَالصَّفِّ الأَوَّلِ ثُمَّ لَمْ يَجِدُوا إِلاَّ أَنْ يَسْتَهِمُوا عَلَيْهِ لاَسْتَهَمُوا عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ إِسْحَاقُ بْنُ مُوسَى الأَنْصَارِيُّ حَدَّثَنَا مَعْنٌ حَدَّثَنَا مَالِكٌ عَنْ سُمَىٍّ عَنْ أَبِي صَالِحٍ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِثْلَهُ ‏.‏
Narrator not mentioned:And the Prophet said: "If the people knew what (reward) is in the call (Adhan) and the first row, and they found no other way to get that except drawing lots, then they would draw lots
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।