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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 218

नंबर 218किताब 2, नंबर 70
قَالَ مُجَاهِدٌ وَسُئِلَ ابْنُ عَبَّاسٍ عَنْ رَجُلٍ، يَصُومُ النَّهَارَ وَيَقُومُ اللَّيْلَ لاَ يَشْهَدُ جُمُعَةً وَلاَ جَمَاعَةً قَالَ هُوَ فِي النَّارِ ‏.‏ قَالَ حَدَّثَنَا بِذَلِكَ هَنَّادٌ حَدَّثَنَا الْمُحَارِبِيُّ عَنْ لَيْثٍ عَنْ مُجَاهِدٍ ‏.‏ قَالَ وَمَعْنَى الْحَدِيثِ أَنْ لاَ يَشْهَدَ الْجَمَاعَةَ وَالْجُمُعَةَ رَغْبَةً عَنْهَا وَاسْتِخْفَافًا بِحَقِّهَا وَتَهَاوُنًا بِهَا ‏.‏
Mujahid said:"Ibn Abbas was asked about a man who fasted during the day and stood (in prayers) during the night, but he did not attend the Friday prayer nor congregational prayer. He replied: 'He is in the Fire
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।