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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 209

नंबर 209किताब 2, नंबर 61
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو زُبَيْدٍ، - وَهُوَ عَبْثَرُ بْنُ الْقَاسِمِ عَنْ أَشْعَثَ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي الْعَاصِ، قَالَ إِنَّ مِنْ آخِرِ مَا عَهِدَ إِلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنِ اتَّخِذْ مُؤَذِّنًا لاَ يَأْخُذُ عَلَى أَذَانِهِ أَجْرًا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عُثْمَانَ حَدِيثٌ حَسَنٌ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَهْلِ الْعِلْمِ كَرِهُوا أَنْ يَأْخُذَ الْمُؤَذِّنُ عَلَى الأَذَانِ أَجْرًا وَاسْتَحَبُّوا لِلْمُؤَذِّنِ أَنْ يَحْتَسِبَ فِي أَذَانِهِ ‏.‏
Uthman bin Abi Al-As narrated:"Indeed, amount the last (of orders) Allah's Messenger ordered me with was to employ a Mu'adh-dhin who would not take a wage for his Adhan
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।