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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 201

नंबर 201किताब 2, नंबर 53
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ مُوسَى، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، قَالَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ لاَ يُنَادِي بِالصَّلاَةِ إِلاَّ مُتَوَضِّئٌ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَهَذَا أَصَحُّ مِنَ الْحَدِيثِ الأَوَّلِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ لَمْ يَرْفَعْهُ ابْنُ وَهْبٍ وَهُوَ أَصَحُّ مِنْ حَدِيثِ الْوَلِيدِ بْنِ مُسْلِمٍ ‏.‏ وَالزُّهْرِيُّ لَمْ يَسْمَعْ مِنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ‏.‏ وَاخْتَلَفَ أَهْلُ الْعِلْمِ فِي الأَذَانِ عَلَى غَيْرِ وُضُوءٍ فَكَرِهَهُ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ وَبِهِ يَقُولُ الشَّافِعِيُّ وَإِسْحَاقُ ‏.‏ وَرَخَّصَ فِي ذَلِكَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَابْنُ الْمُبَارَكِ وَأَحْمَدُ ‏.‏
Ibn Shihab narrated that :Abu Hurairah said: "None should call (for the prayer except for one with Wudu)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।