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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 193

नंबर 193किताब 2, नंबर 45
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ الثَّقَفِيُّ، وَيَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ أُمِرَ بِلاَلٌ أَنْ يَشْفَعَ، الأَذَانَ وَيُوتِرَ الإِقَامَةَ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنِ ابْنِ عُمَرَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى وَحَدِيثُ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَهُوَ قَوْلُ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَالتَّابِعِينَ وَبِهِ يَقُولُ مَالِكٌ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَاقُ ‏.‏
Anas bin Malik narrated:"Bilal was ordered to make the phrases of the Adhan even, and the phrases of the Iqamah odd
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।