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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 171

नंबर 171किताब 2, नंबर 23
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ وَهْبٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْجُهَنِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَرَ بْنِ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهُ ‏ "‏ يَا عَلِيُّ ثَلاَثٌ لاَ تُؤَخِّرْهَا الصَّلاَةُ إِذَا آنَتْ وَالْجَنَازَةُ إِذَا حَضَرَتْ وَالأَيِّمُ إِذَا وَجَدْتَ لَهَا كُفْؤًا ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ حَسَنٌ ‏.‏
Ali bin AbI Talib narrated that :the Prophet said to him: 'Ali! Three are not to be delayed: Salat when its time comes, a funeral whet it (a prepared body) is present, and the (marriage of a) single woman when there is an equal for her
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।