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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 163

नंबर 163किताब 2, नंबर 15
وَحَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ مُعَاذٍ الْبَصْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ ابْنُ عُلَيَّةَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ نَحْوَهُ ‏.‏ وَهَذَا أَصَحُّ ‏.‏
Similar narration is reported by Bishr ibn Mu'adh Al-Bari who said that :Isma'il ibn Ulayyah narrated to him from Ibn Juraij. This latter chain is more correct
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · The Book on Salat (Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।