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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1509

नंबर 1509किताब 19, नंबर 20
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَأْكُلُ أَحَدُكُمْ مِنْ لَحْمِ أُضْحِيَتِهِ فَوْقَ ثَلاَثَةِ أَيَّامٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَائِشَةَ وَأَنَسٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ ابْنِ عُمَرَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ - وَإِنَّمَا كَانَ النَّهْىُ مِنَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مُتَقَدِّمًا ثُمَّ رَخَّصَ بَعْدَ ذَلِكَ ‏.‏
Narrated Ibn 'Umar:That the Prophet (ﷺ) said: "None of you should eat from the meat of his sacrificial animal beyond three days
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Bukhari And MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book on Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।