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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1494

नंबर 1494किताब 19, नंबर 2
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ ضَحَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِكَبْشَيْنِ أَمْلَحَيْنِ أَقْرَنَيْنِ ذَبَحَهُمَا بِيَدِهِ وَسَمَّى وَكَبَّرَ وَوَضَعَ رِجْلَهُ عَلَى صِفَاحِهِمَا ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ عَلِيٍّ وَعَائِشَةَ وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَأَبِي أَيُّوبَ وَجَابِرٍ وَأَبِي الدَّرْدَاءِ وَأَبِي رَافِعٍ وَابْنِ عُمَرَ وَأَبِي بَكْرَةَ أَيْضًا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Narrated Anas bin Malik:"The Messenger of Allah (ﷺ) slaughtered two horned male sheep which were mostly white. He slaughtered them with his hand and mentioned Allah's Name, and he said 'Allahu Akbar', and put his foot on their side
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · The Book on Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।