حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ عَيَّاشٍ، عَنْ أَبِي سَعْدٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَدَى الْعَامِرِيَّيْنِ بِدِيَةِ الْمُسْلِمِينَ وَكَانَ لَهُمَا عَهْدٌ مِنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم . قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ غَرِيبٌ لاَ نَعْرِفُهُ إِلاَّ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ . وَأَبُو سَعْدٍ الْبَقَّالُ اسْمُهُ سَعِيدُ بْنُ الْمَرْزُبَانِ .
Narrated Ibn 'Abbas:"The Prophet (ﷺ) assigned the same blood-money for the two 'Amiris as that of the Muslims, and they had covenant from the Messenger of Allah (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
Daif IsnaadAhmad Muhammad Shakir
Daif IsnaadAl-Albani
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।