सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1387

नंबर 1387किताब 16, नंबर 2
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سَعِيدٍ الدَّارِمِيُّ، أَخْبَرَنَا حَبَّانُ، وَهُوَ ابْنُ هِلاَلٍ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَاشِدٍ، أَخْبَرَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ مُوسَى، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ قَتَلَ مُؤْمِنًا مُتَعَمِّدًا دُفِعَ إِلَى أَوْلِيَاءِ الْمَقْتُولِ فَإِنْ شَاءُوا قَتَلُوا وَإِنْ شَاءُوا أَخَذُوا الدِّيَةَ وَهِيَ ثَلاَثُونَ حِقَّةً وَثَلاَثُونَ جَذَعَةً وَأَرْبَعُونَ خَلِفَةً وَمَا صَالَحُوا عَلَيْهِ فَهُوَ لَهُمْ ‏"‏ ‏.‏ وَذَلِكَ لِتَشْدِيدِ الْعَقْلِ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏
अम्र बिन शुऐब से वर्णित है, वह अपने पिता से वर्णन करते हैं, तथा वह अपने दादा से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जो किसी मोमिन को जान-बूझकर क़त्ल करेगा, उसे मृतक के घर वालों के हवाले किया जाएगा। वह चाहें तो उसे क़त्ल कर दें और चाहें तो उससे दियत लें, जो इस प्रकार है : 30 ऐसी ऊँटनियाँ जो तीन साल पूरे करके चौथे साल में प्रवेश कर चुकी हों, 30 ऐसी ऊँटनियाँ जो चार साल पूरे करके पाँचवें साल में प्रवेश कर चुकी हों और 40 गाभिन ऊँटनियाँ। साथ ही दोनों पक्ष के लोग जिसपर सुलह कर लें, वह मृतक के परिजनों के लिए है। यह दियत का सबसे सख़्त प्रकार है।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • HasanBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 16 · The Book on Blood Money

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।