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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1384

नंबर 1384किताब 15, नंबर 65
حَدَّثَنَا هَنَّادٌ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ أَبِي حَصِينٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ رَافِعِ بْنِ خَدِيجٍ، قَالَ نَهَانَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنْ أَمْرٍ كَانَ لَنَا نَافِعًا إِذَا كَانَتْ لأَحَدِنَا أَرْضٌ أَنْ يُعْطِيَهَا بِبَعْضِ خَرَاجِهَا أَوْ بِدَرَاهِمَ وَقَالَ ‏ "‏ إِذَا كَانَتْ لأَحَدِكُمْ أَرْضٌ فَلْيَمْنَحْهَا أَخَاهُ أَوْ لِيَزْرَعْهَا ‏"‏ ‏.‏
Narrated Rafi' bin Khadij:"The Messenger of Allah (ﷺ) forbade us from a matter that was of benefit for us. When one of us had some land and we would let someone use it for a portion of its produce or some Dirham. He said: 'When one of you has some land then let him grant it to his brother, or let him farm it
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAhmad Muhammad Shakir
  • ShadhAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · The Chapters On Judgements From The Messenger of Allah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।