حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ حَمْزَةَ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ أَبِي مَرْيَمَ، عَنِ الْقَاسِمِ بْنِ مُخَيْمِرَةَ، عَنْ أَبِي مَرْيَمَ، صَاحِبِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم نَحْوَ هَذَا الْحَدِيثِ بِمَعْنَاهُ . وَيَزِيدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ شَامِيٌّ وَبُرَيْدُ بْنُ أَبِي مَرْيَمَ كُوفِيٌّ وَأَبُو مَرْيَمَ هُوَ عَمْرُو بْنُ مُرَّةَ الْجُهَنِيُّ .
(Another chain) from Abu Maryam the Companion of the Prophet (ﷺ), from the Prophet (ﷺ)
स्रोत में दर्ज दर्जे
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।