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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1320

नंबर 1320किताब 14, नंबर 124
حَدَّثَنَا عَبَّاسُ بْنُ مُحَمَّدٍ الدُّورِيُّ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ بْنُ عَطَاءٍ، أَخْبَرَنَا إِسْرَائِيلُ، عَنْ زَيْدِ بْنِ عَطَاءِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ غَفَرَ اللَّهُ لِرَجُلٍ كَانَ قَبْلَكُمْ كَانَ سَهْلاً إِذَا بَاعَ سَهْلاً إِذَا اشْتَرَى سَهْلاً إِذَا اقْتَضَى ‏"‏ ‏.‏ قَالَ هَذَا حَدِيثٌ صَحِيحٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ مِنْ هَذَا الْوَجْهِ ‏.‏
Narrated Jabir: That the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Allah forgave a man who was before you: He was tolerant when selling, tolerant when purchasing, and tolerant when repaying." He said: This Hadith is Gharib Sahih Hasan from this route
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 14 · The Book on Business

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।