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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1189

नंबर 1189किताब 13, नंबर 16
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مُحَمَّدٍ، أَنْبَأَنَا ابْنُ الْمُبَارَكِ، أَنْبَأَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ، عَنِ الْحَارِثِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ حَمْزَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ كَانَتْ تَحْتِي امْرَأَةٌ أُحِبُّهَا وَكَانَ أَبِي يَكْرَهُهَا فَأَمَرَنِي أَبِي أَنْ أُطَلِّقَهَا فَأَبَيْتُ فَذَكَرْتُ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ يَا عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ طَلِّقِ امْرَأَتَكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ إِنَّمَا نَعْرِفُهُ مِنْ حَدِيثِ ابْنِ أَبِي ذِئْبٍ ‏.‏
Ibn Umar narrated:"I had a wife whom I loved, but my father disliked her, so he ordered me to divorce her but I refused. I mentioned that to the Prophet and he said: 'O Abdullah bin Umar! Divorce your wife
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAhmad Muhammad Shakir
  • HasanAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 13 · The Book on Divorce and Li'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।