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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1115

नंबर 1115किताब 11, नंबर 37
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، وَعَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَعْتَقَ صَفِيَّةَ وَجَعَلَ عِتْقَهَا صَدَاقَهَا ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ صَفِيَّةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَنَسٍ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ بَعْضِ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَغَيْرِهِمْ وَهُوَ قَوْلُ الشَّافِعِيِّ وَأَحْمَدَ وَإِسْحَاقَ ‏.‏ وَكَرِهَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ أَنْ يُجْعَلَ عِتْقُهَا صَدَاقَهَا حَتَّى يَجْعَلَ لَهَا مَهْرًا سِوَى الْعِتْقِ ‏.‏ وَالْقَوْلُ الأَوَّلُ أَصَحُّ ‏.‏
Anas bin Malik narrated:"The Messenger of Allah emancipated Safiyyah and he made her emancipation her dowry
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 11 · The Book on Marriage

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।