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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 995

नंबर 995किताब 10, नंबर 31
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا عِكْرِمَةُ بْنُ عَمَّارٍ، عَنْ هِشَامِ بْنِ حَسَّانَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إِذَا وَلِيَ أَحَدُكُمْ أَخَاهُ فَلْيُحَسِّنْ كَفَنَهُ ‏"‏ ‏.‏ وَفِيهِ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ غَرِيبٌ ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ الْمُبَارَكِ قَالَ سَلاَّمُ بْنُ أَبِي مُطِيعٍ فِي قَوْلِهِ ‏"‏ وَلْيُحَسِّنْ أَحَدُكُمْ كَفَنَ أَخِيهِ ‏"‏ قَالَ هُوَ الصِّفَاقُ لَيْسَ بِالْمُرْتَفِعِ ‏.‏
Abu Qatadah narrated that:The Messenger of Allah said: "When one of you shrouds his brother, then let him use the best of his shrouds
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।