सीधे कंटेंट पर जाएँ
जामे तिर्मिज़ी

नंबर 972

नंबर 972किताब 10, नंबर 8
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ هِلاَلٍ الْبَصْرِيُّ الصَّوَّافُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، أَنَّ جِبْرِيلَ، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ اشْتَكَيْتَ قَالَ ‏ "‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ بِاسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ مِنْ كُلِّ شَيْءٍ يُؤْذِيكَ مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ وَعَيْنِ حَاسِدٍ بِاسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ وَاللَّهُ يَشْفِيكَ ‏.‏
Abu Sa'eed narrated that:Jibril came to the Prophet and said: "O Muhammad! Are you suffering?" He said: "Yes." He said: "In the Name of Allah, I recite a prayer (Ruqyah) over you, from the evil of every person and evil eye. In the Name of Allah I recite a prayer (Ruqyah) over you, may Allah cure you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।