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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1066

नंबर 1066किताब 10, नंबर 102
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مِقْدَامٍ أَبُو الأَشْعَثِ الْعِجْلِيُّ، حَدَّثَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي يُحَدِّثُ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، عَنْ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ مَنْ أَحَبَّ لِقَاءَ اللَّهِ أَحَبَّ اللَّهُ لِقَاءَهُ وَمَنْ كَرِهَ لِقَاءَ اللَّهِ كَرِهَ اللَّهُ لِقَاءَهُ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَبِي مُوسَى وَأَبِي هُرَيْرَةَ وَعَائِشَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عُبَادَةَ بْنِ الصَّامِتِ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Ubadah bin As-Samit narrated that:The Prophet said: "Whoever loves to meet Allah, then Allah loves to meet him. And whoever dislikes meeting Allah, then Allah dislikes meeting him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।