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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1063

नंबर 1063किताब 10, नंबर 99
حَدَّثَنَا الأَنْصَارِيُّ، حَدَّثَنَا مَعْنٌ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، ح وَحَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ سُمَىٍّ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ الشُّهَدَاءُ خَمْسٌ الْمَطْعُونُ وَالْمَبْطُونُ وَالْغَرِقُ وَصَاحِبُ الْهَدْمِ وَالشَّهِيدُ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَفِي الْبَابِ عَنْ أَنَسٍ وَصَفْوَانَ بْنِ أُمَيَّةَ وَجَابِرِ بْنِ عَتِيكٍ وَخَالِدِ بْنِ عُرْفُطَةَ وَسُلَيْمَانَ بْنِ صُرَدٍ وَأَبِي مُوسَى وَعَائِشَةَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ أَبِي هُرَيْرَةَ حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏
Abu Hurairah narrated that:The Messenger of Allah said: "The martyrs are five: Those who die of the plague, stomach illness, drowning, being crushed, and the martyr in the cause of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।