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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 1052

नंबर 1052किताब 10, नंबर 88
حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الأَسْوَدِ أَبُو عَمْرٍو الْبَصْرِيُّ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رَبِيعَةَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ نَهَى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ تُجَصَّصَ الْقُبُورُ وَأَنْ يُكْتَبَ عَلَيْهَا وَأَنْ يُبْنَى عَلَيْهَا وَأَنْ تُوطَأَ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ قَدْ رُوِيَ مِنْ غَيْرِ وَجْهٍ عَنْ جَابِرٍ ‏.‏ وَقَدْ رَخَّصَ بَعْضُ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْهُمُ الْحَسَنُ الْبَصْرِيُّ فِي تَطْيِينِ الْقُبُورِ ‏.‏ وَقَالَ الشَّافِعِيُّ لاَ بَأْسَ أَنْ يُطَيَّنَ الْقَبْرُ ‏.‏
Jabir narrated:"The Messenger of Allah prohibited plastering graves, writing on them, building over them, and treading on them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 10 · The Book on Jana''iz (Funerals)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।