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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 4

नंबर 4किताब 1, नंबर 4
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، مُحَمَّدُ بْنُ زَنْجَوَيْهِ الْبَغْدَادِيُّ وَغَيْرُ وَاحِدٍ قَالَ حَدَّثَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ قَرْمٍ، عَنْ أَبِي يَحْيَى الْقَتَّاتِ، عَنْ مُجَاهِدٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، رضى الله عنهما قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مِفْتَاحُ الْجَنَّةِ الصَّلاَةُ وَمِفْتَاحُ الصَّلاَةِ الْوُضُوءُ ‏"‏ ‏.‏
Jabir bin 'Abdullah, may Allah be pleased with them, narrated that :Allah's Messenger said: "The key to Paradise is Salat, and the key to Salat is Wudu
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book on Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।