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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 29

नंबर 29किताब 1, नंबर 29
حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ بْنِ أَبِي الْمُخَارِقِ أَبِي أُمَيَّةَ، عَنْ حَسَّانَ بْنِ بِلاَلٍ، قَالَ رَأَيْتُ عَمَّارَ بْنَ يَاسِرٍ تَوَضَّأَ فَخَلَّلَ لِحْيَتَهُ فَقِيلَ لَهُ أَوْ قَالَ فَقُلْتُ لَهُ أَتُخَلِّلُ لِحْيَتَكَ قَالَ وَمَا يَمْنَعُنِي وَلَقَدْ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُخَلِّلُ لِحْيَتَهُ ‏.‏
हस्सान बिन बिलाल कहते हैं : मैंने अम्मार बिन यासिर को दाढ़ी का ख़िलाल करते देखा तो उनसे कहा गया, अथवा यह कहा कि मैंने उनसे कहा : क्या आप दाढ़ी का खिलाल करते हैं? उन्होंने कहा : “क्यों न करूँ? बेशक मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को अपनी दाढ़ी का ख़िलाल करते हुए देखा है।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAhmad Muhammad Shakir
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 1 · The Book on Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।