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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 146

नंबर 146किताब 1, नंबर 146
حَدَّثَنَا أَبُو سَعِيدٍ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ الأَشَجُّ، حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ غِيَاثٍ، وَعُقْبَةُ بْنُ خَالِدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، وَابْنُ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَلِمَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُقْرِئُنَا الْقُرْآنَ عَلَى كُلِّ حَالٍ مَا لَمْ يَكُنْ جُنُبًا ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى حَدِيثُ عَلِيٍّ هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَبِهِ قَالَ غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَهْلِ الْعِلْمِ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَالتَّابِعِينَ ‏.‏ قَالُوا يَقْرَأُ الرَّجُلُ الْقُرْآنَ عَلَى غَيْرِ وُضُوءٍ وَلاَ يَقْرَأُ فِي الْمُصْحَفِ إِلاَّ وَهُوَ طَاهِرٌ ‏.‏ وَبِهِ يَقُولُ سُفْيَانُ الثَّوْرِيُّ وَالشَّافِعِيُّ وَأَحْمَدُ وَإِسْحَاقُ ‏.‏
अली रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है, वह कहते हैं : रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमें हर हाल में क़ुरआन पढ़ाते थे, सिवाय जनाबत (अपवित्रता) की हालत के।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAhmad Muhammad Shakir
  • DaifAl-Albani
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • HasanZubair Ali Zai

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 1 · The Book on Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।