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जामे तिर्मिज़ी

नंबर 111

नंबर 111किताब 1, नंबर 111
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ مَنِيعٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُبَارَكِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَهُ ‏.‏ قَالَ أَبُو عِيسَى هَذَا حَدِيثٌ حَسَنٌ صَحِيحٌ ‏.‏ وَإِنَّمَا كَانَ الْمَاءُ مِنَ الْمَاءِ فِي أَوَّلِ الإِسْلاَمِ ثُمَّ نُسِخَ بَعْدَ ذَلِكَ ‏.‏ وَهَكَذَا رَوَى غَيْرُ وَاحِدٍ مِنْ أَصْحَابِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِنْهُمْ أُبَىُّ بْنُ كَعْبٍ وَرَافِعُ بْنُ خَدِيجٍ ‏.‏ وَالْعَمَلُ عَلَى هَذَا عِنْدَ أَكْثَرِ أَهْلِ الْعِلْمِ عَلَى أَنَّهُ إِذَا جَامَعَ الرَّجُلُ امْرَأَتَهُ فِي الْفَرْجِ وَجَبَ عَلَيْهِمَا الْغُسْلُ وَإِنْ لَمْ يُنْزِلاَ ‏.‏
Ma'mar narrated :a similar narration (as Hadith no. 110) from, Az-Zuhri, with this chain
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihBashar Awad Maarouf
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 1 · The Book on Purification

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।