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सुनन नसाई

नंबर 736

नंबर 736किताब 8, नंबर 49
أَخْبَرَنَا الْحَسَنُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ بْنِ سُلَيْمَانَ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سَيَّارٌ، عَنْ يَزِيدَ الْفَقِيرِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ جُعِلَتْ لِيَ الأَرْضُ مَسْجِدًا وَطَهُورًا أَيْنَمَا أَدْرَكَ رَجُلٌ مِنْ أُمَّتِي الصَّلاَةَ صَلَّى ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Jabir bin 'Abdullah said:"The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'The earth has been made for me a place of prostration and a means of purification, so wherever a man of my Ummah is when the time for prayer comes, let him pray
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Book of the Masjids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।