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सुनन नसाई

नंबर 732

नंबर 732किताब 8, नंबर 45
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ بْنِ أَعْيَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعَيْبٌ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، عَنِ ابْنِ أَبِي هِلاَلٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي مَرْوَانُ بْنُ عُثْمَانَ، أَنَّ عُبَيْدَ بْنَ حُنَيْنٍ، أَخْبَرَهُ عَنْ أَبِي سَعِيدِ بْنِ الْمُعَلَّى، قَالَ كُنَّا نَغْدُو إِلَى السُّوقِ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَنَمُرُّ عَلَى الْمَسْجِدِ فَنُصَلِّي فِيهِ ‏.‏
It was narrated that Abu Sa'eed bin Al-Mu'alla said:"We used to go to the marketplace in the morning at the time of the Messenger of Allah (ﷺ), and we would pass through the Masjid and pray there
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Book of the Masjids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।