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सुनन नसाई

नंबर 699

नंबर 699किताब 8, नंबर 12
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا مُجَمِّعُ بْنُ يَعْقُوبَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سُلَيْمَانَ الْكِرْمَانِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا أُمَامَةَ بْنَ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، قَالَ قَالَ أَبِي قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ خَرَجَ حَتَّى يَأْتِيَ هَذَا الْمَسْجِدَ مَسْجِدَ قُبَاءٍ فَصَلَّى فِيهِ كَانَ لَهُ عِدْلَ عُمْرَةٍ ‏"‏ ‏.‏
Abu Umamah bin Sahl bin Hunaif said:"My father said: 'The Messenger of Allah (ﷺ) said: 'Whoever goes out to his Masjid - the Masjid of Quba' and prays therein, that will be equivalent to 'Umrah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · The Book of the Masjids

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।