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सुनन नसाई

नंबर 676

नंबर 676किताब 7, नंबर 51
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قُدَامَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ مُجَمِّعٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلٍ، قَالَ سَمِعْتُ مُعَاوِيَةَ، - رضى الله عنه - يَقُولُ سَمِعْتُ مِنْ، رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَسَمِعَ الْمُؤَذِّنَ فَقَالَ مِثْلَ مَا قَالَ ‏.‏
It was narrated that Abu Umamah bin Sahl said:"I heard Mu'awiyah say: 'I heard the Messenger of Allah (S.A.W), when he heard the Mu'adhdhin, repeating what he said
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • -Abu Ghuddah
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।