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सुनन नसाई

नंबर 660

नंबर 660किताब 7, नंबर 35
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ وَكِيعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم جَمَعَ بَيْنَهُمَا بِالْمُزْدَلِفَةِ صَلَّى كُلَّ وَاحِدَةٍ مِنْهُمَا بِإِقَامَةٍ وَلَمْ يَتَطَوَّعْ قَبْلَ وَاحِدَةٍ مِنْهُمَا وَلاَ بَعْدُ ‏.‏
It was narrated from Salim, from his father, that the Prophet (S.A.W) joined them (Maghrib and 'Isha') in Al-Muzdalifah, and he prayed each of them with an Iqamah, and he did not offer any voluntary prayer before or after either of them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।