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सुनन नसाई

नंबर 656

नंबर 656किताब 7, नंबर 31
أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ هَارُونَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَاتِمُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، قَالَ حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ دَفَعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَتَّى انْتَهَى إِلَى الْمُزْدَلِفَةِ فَصَلَّى بِهَا الْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ بِأَذَانٍ وَإِقَامَتَيْنِ وَلَمْ يُصَلِّ بَيْنَهُمَا شَيْئًا ‏.‏
It was narrated that Jabir bin 'Abdullah said:"The Messenger of Allah (S.A.W) moved until he came to Al-Muzdalifah, where he prayed Maghrib and 'Isha' with one Adhan and two Iqamahs, and he did not offer any prayer in between them
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।