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सुनन नसाई

नंबर 645

नंबर 645किताब 7, नंबर 20
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالاَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ زُرَيْعٍ - قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مُوسَى بْنِ أَبِي عُثْمَانَ، عَنْ أَبِي يَحْيَى، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، سَمِعَهُ مِنْ، فَمِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ الْمُؤَذِّنُ يُغْفَرُ لَهُ بِمَدِّ صَوْتِهِ وَيَشْهَدُ لَهُ كُلُّ رَطْبٍ وَيَابِسٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah, who heard it from the mouth of the Messenger of Allah (S.A.W):"The Mu'adhdhin will be forgiven as far as his voice reaches, and every wet and dry thing will bear witness for him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।