सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 643

नंबर 643किताब 7, नंबर 18
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَوْنِ بْنِ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَخَرَجَ بِلاَلٌ فَأَذَّنَ فَجَعَلَ يَقُولُ فِي أَذَانِهِ هَكَذَا يَنْحَرِفُ يَمِينًا وَشِمَالاً ‏.‏
It was narrated from 'Awn bin Abi Juhaifah that his father said:"I came to the Prophet (S.A.W) and Bilal came out and called the Adhan and he started doing like this in his Adhan, turning to his right and left
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 7 · The Book of the Adhan (The Call to Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।