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सुनन नसाई

नंबर 625

नंबर 625किताब 6, नंबर 132
أَخْبَرَنَا أَبُو عَاصِمٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَبَّانُ بْنُ هِلاَلٍ، حَدَّثَنَا حَبِيبٌ، عَنْ عَمْرِو بْنِ هَرِمٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ زَيْدٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ أَدْلَجَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ عَرَّسَ فَلَمْ يَسْتَيْقِظْ حَتَّى طَلَعَتِ الشَّمْسُ أَوْ بَعْضُهَا فَلَمْ يُصَلِّ حَتَّى ارْتَفَعَتِ الشَّمْسُ فَصَلَّى وَهِيَ صَلاَةُ الْوُسْطَى ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"The Messenger of Allah (ﷺ) set out at nightfall, then stopped to camp at the end of the night, and he did not wake up until the sun had risen or had partly risen. He did not pray until the sun had risen (fully), then he prayed, and that was the 'middle prayer' (Salat Al-Wusta)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • MunkarAbu Ghuddah
  • MunkarAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।