أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ عُمَارَةَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ مَا رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم جَمَعَ بَيْنَ صَلاَتَيْنِ إِلاَّ بِجَمْعٍ وَصَلَّى الصُّبْحَ يَوْمَئِذٍ قَبْلَ وَقْتِهَا .
It was narrated that 'Abdullah said:"I never saw the Messenger of Allah (ﷺ) combine any two prayers except in Al-Muzdalifah, and on that day he prayed Subh before its time
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।