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सुनन नसाई

नंबर 605

नंबर 605किताब 6, नंबर 112
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ يَزِيدَ، أَنَّ أَبَا أَيُّوبَ الأَنْصَارِيَّ، أَخْبَرَهُ أَنَّهُ، صَلَّى مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ الْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ بِالْمُزْدَلِفَةِ جَمِيعًا ‏.‏
It was narrated from 'Abdullah bin Yazid that Abu Ayyub Al-Ansari told him, that during the Farewell Pilgrimage. He prayed with the Messenger of Allah (ﷺ) Maghrib and 'Isha' prayers together at Al-Muzdalifah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।