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सुनन नसाई

नंबर 603

नंबर 603किताब 6, नंबर 110
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، عَنْ أَبِي الشَّعْثَاءِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ صَلَّيْتُ وَرَاءَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثَمَانِيًا جَمِيعًا وَسَبْعًا جَمِيعًا ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"I prayed behind the Messenger of Allah (ﷺ) eight (Rak'ahs) together and seven (Rak'ahs) together
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।