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सुनन नसाई

नंबर 601

नंबर 601किताब 6, नंबर 108
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ صَلَّى رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ جَمِيعًا وَالْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ جَمِيعًا مِنْ غَيْرِ خَوْفٍ وَلاَ سَفَرٍ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Abbas said:"The Messenger of Allah (ﷺ) prayed Zuhr and 'Asr together, and Maghrib and 'Isha' together, when there was no fear and he was not traveling
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।