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सुनन नसाई

नंबर 594

नंबर 594किताब 6, नंबर 101
أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ سَوَّادِ بْنِ الأَسْوَدِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ أَنْبَأَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ حَدَّثَنَا جَابِرُ بْنُ إِسْمَاعِيلَ، عَنْ عُقَيْلٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ أَنَسٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ كَانَ إِذَا عَجِلَ بِهِ السَّيْرُ يُؤَخِّرُ الظُّهْرَ إِلَى وَقْتِ الْعَصْرِ فَيَجْمَعُ بَيْنَهُمَا وَيُؤَخِّرُ الْمَغْرِبَ حَتَّى يَجْمَعَ بَيْنَهَا وَبَيْنَ الْعِشَاءِ حِينَ يَغِيبُ الشَّفَقُ ‏.‏
It was narrated from Anas that the Messenger of Allah (ﷺ) said:"If the Messenger of Allah (ﷺ) wanted to travel quickly, he would delay Zuhr until the time of 'Asr and combine them, and he would delay Maghrib until he combined it with 'Isha' when the twilight had disappeared
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 6 · The Book of the Times (of Prayer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।